चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri)

Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि को लेकर हिंदू धर्म में अनेको मान्यताएँ प्रचलित है जिनमें मुख्यतः माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन ही माँ दुर्गा का पृथ्वी पर कन्या स्वरूप जन्म हुआ था। यह भी माना जाता है कि माँ दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्मा जी द्वारा इस सृष्टि का निर्माण हुआ था, इसीलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत होती है। इसके अतिरिक्त यह भी माना जाता है कि प्रभु श्री विष्णु के सातवें अवतार प्रभु श्री राम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था, इस प्रकार धार्मिक दृष्टि से भी चैत्र नवरात्र का बहुत गहरा महत्व है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार यह पृथ्वी के द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां में से एक है। तथ्यों के अनुसार मार्च एवं सितंबर के महीने में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो प्रमुख नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणुओं के हमले की सबसे अधिक संभावना होती है, इसलिए साधना द्वारा शुद्धता व स्वच्छता से आत्म एवं जन की रक्षा की जाती है।

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हिन्दू धर्म के धार्मिक ग्रंथों की मान्यता अनुसार नवरात्र के नौ दिन उपवास रखकर देवी के अवतार के नौं अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

नवरात्रि की कालावधि में माँ दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इन नौ दिनों तक माँ दुर्गा का पृथ्वी पर वास होता है। पृथ्वीलोक को देवी दुर्गा का मायका/पीहर माना जाता है। यहाँ माँ सबका स्नेह लेने और प्यार देने आती है।

चैत्र नवरात्रि 2020 शुभ मुहूर्त

घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 19 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक।

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ: दोपहर 02 बजकर 57 मिनट से (24 मार्च 2020)।

प्रतिपदा तिथि समाप्ति: अगले दिन शाम 05 बजकर 26 मिनट तक (25 मार्च 2020 )

मीन लग्न मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 19 मिनट से आरम्भ होकर सुबह 07 बजकर 17 मिनट तक (25 मार्च 2020)।

चैत्र नवरात्रि हेतु पूजन विधि

  • चैत्र नवरात्रि के दिन उपासक को प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि क्रिया को सम्पन्न कर साफ पीले वस्त्र (अगर संभव हो तो नये वस्त्र) धारण कर पूजा वेदी पर बैठना चाहिए।
  • इसके बाद साधक को षोडशोपचार पूजन द्वारा स्वयं का शुद्धिकरण करना चाहिए।
  • स्वयं के शारिरिक शुद्धि के साथ-साथ मानसिक शुद्धि पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • शारिरिक, मानसिक एवं आत्मिक शुद्धि के फलस्वरूप व्यक्ति को एक चौंकी लेकर उसका गंगाजल आदि छिड़क शुद्दिकरण कर उस पर मिट्टी, पीतल अथवा ताबें का कलश स्थापित करना चाहिए।
  • कलश स्थापित कर उस कलश पर स्वास्तिक का चिन्ह बनायें और फिर उस कलश पर एक नारियल लाल रंग की चुन्नी लपेटने के बाद रख दें।  इसके साथ आम के पल्लव को भी रखें।
  • तत्पश्चात किसी बड़े बर्तन में मिट्टी डालकर उसमें ज्वार बों दें।
  • आज के दिन माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें और उनका रोली से तिलक करें।
  • तत्पश्चात कलश एवं नारियल का तिलक करें और माँ दुर्गा को फूलों की माला पहनाकर उन्हें फूल अर्पण कर कर्मकांड अनुसार विधिवत पूजन करें।
  • फिर एक गोबर के कंडे (उपले) को जलाकर पूजा स्थल में रखें और उस पर घी डालें और फिर कंडे पर कपूर, दो लौंग के जोड़े और बताशे आदि का अर्पण करें।
  • इसके पश्चात माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और फिर दुर्गासप्तशती का पाठ करें।
  • और अंत में पूजा-उपासना कर माँ का आशिर्वाद ग्रहण करे और अम्बे माँ की आरती करें।

चैत्र नवरात्र तिथि

पहला चैत्र नवरात्र, प्रथमा तिथि, 25 मार्च 2020, दिन बुधवार, माँ शैलपुत्री।
दूसरा चैत्र नवरात्र, द्वितीया तिथि  26 मार्च 2020, दिन बृहस्पतिवार, माता ब्रह्मचारिणी।
तीसरा चैत्र नवरात्र, तृतीया तिथि, 27 मार्च 2020, दिन शुक्रवार माता चंद्रघंटा।
चौथा चैत्र नवरात्र, चतुर्थी तिथि, 28 मार्च 2020, दिन शनिवार, माता कूष्माण्डा।
पांचवां चैत्र नवरात्र, पंचमी तिथि, 29 मार्च 2020, दिन रविवार, स्कंदमाता।
छठा चैत्र नवरात्रा, षष्ठी तिथि, 30 मार्च 2020, दिन सोमवार, माँ कात्यायनी।
सातवां चैत्र नवरात्र, सप्तमी तिथि, 31 मार्च 2020, दिन मंगलवार, माँ कालरात्रि।
आठवां चैत्र नवरात्र, अष्टमी तिथि, 1 अप्रैल 2020, दिन बुधवार, देवी महागौरी।
नौवां चैत्र नवरात्र, नवमी तिथि 2 अप्रैल, 2020 दिन बृहस्पतिवार, देवी सिद्धिदात्री।

माँ दुर्गा  की उपासना हेतु मंत्र

  1. सर्वसूर्यमांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
  2. ॐ जयन्ती शुक्रा काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
  3. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  4. या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  5. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।

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