रत्न ज्योतिष


Ratna (Gem Stones)

ज्योतिष विज्ञान में रत्नों का अपना एक अलग ही महत्व है। ज्योतिष शास्त्र में मुख्यतः 9 रत्नों को अहम माना गया है। इस शास्त्र के अनुसार प्रत्येक रत्न किसी ना किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।

रत्न हमारी कुंडली में मौजूद ग्रहों की दशा-दिशा को दिशा निर्देशित करते हैं। अगर व्यक्ति अपनी जन्म कुंडली का परिरक्षण कर ग्रह-गोचरों की स्थिति व प्रभाव का अवलोकन कर रत्न धारण करता है, तो जीवन में आ रही विघ्न-बाधाएं एवं क्लेश दूर होते हैं। इसके अतिरिक्त रत्नों को शुभ फल प्राप्ति हेतु भी धारण किया जाता है जो हमारे जीवन के शुभ-लाभ के मार्ग की प्रशस्ति कारक होती है। ऐसे में पहला प्रश्न यह भी उठता है कि आखिरकार इतना महत्वपूर्ण तत्व, रत्न है क्या?  इसके पीछे क्या है मान्यताएं? आदि। तो आइए जानते हैं

रत्न की पीछे की धार्मिक मान्यताएं

आदिकाल से ही रत्न का विशेष अर्थ 'श्रेष्ठत्व' है। रत्न का तात्पर्य भूगर्भीय समुद्र की तलहटी में मौजूद में वर्षों से सिंचित व तापित तत्वों से है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पृथ्वी ग्रह के सहयोग से अपने अंदर रत्नों का प्रादुर्भाव करती है। इसलिए इसे 'रत्नग' भी कहा जाता है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में पुराण अत्यंत ही विश्वसनीय एवं श्रेष्ठ ग्रंथ है। पुराणों में अग्नि पुराण में 'रत्न' का उल्लेख किया गया है। इसका वर्णन करते हुए कहा गया है कि एक बार जब महाबली राक्षस वृत्रासुर ने देव लोक पर आक्रमण कर दिया था, तो सभी देवता उनके त्राहि एवं दुर्व्यवहार से कुपित एवं भयभीत होकर भगवान विष्णु के समक्ष पहुंचे। तब भगवान श्री हरि विष्णु ने देवलोक के अधिपति इंद्र को एक सलाह दी और महर्षि दधीचि से वज्र बनाने हेतु उनकी हड्डियों का दान मांगने को कहा जिसके बाद देवराज इंद्र ने हड्डियों से वज्र निर्मित किया। तत्पश्चात वृत्रासुर का संघार किया। इसी दौरान उस वज्र का कुछ अंश पृथ्वी पर जा गिरा जिससे रत्नों की खानों की उत्पत्ति हुई।

इसके अतिरिक्त एक और मान्यता है कि जब समुद्र मंथन हो रहा था तो उस वक्त अमृत कलश निकलने पर देव एवं राक्षसों में संघर्ष होने लगा था, जिस कारण से अमृत कलश से कुछ बूंदें निकल कर जमीन पर जा गिरी एवं रत्न की खाने निर्मित हो गई।

रत्न व प्रकार

रत्न एक प्रकार का खनिज तत्व है जिसका प्रयोग आभूषण आदि के निर्माण में होता है। विज्ञान के अनुसार यह मुख्यतः तीन तरह के होते हैं। खनिज रत्न, जैविक रत्न और वनस्पतिक रत्न। वहीं प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माना जाता है कि रत्नों में मुख्यतः उच्च कोटि के 84 प्रकार के रत्न पाए जाते हैं जिनमें से मुख्यतः नौं रत्न (पुखराज, गोमेद, नीलम, पन्ना, माणिक्य, मूंगा, मोती, लहसुनिया और हीरा) होते हैं। इनका सीधा संबंध हमारी जन्मकुंडली में मौजूद ग्रह एवं उनके स्थिति से होता है।

प्रायः रत्न महंगे होते हैं। इन सभी नवरत्नों में से सभी रत्नों का अपना एक अलग ही महत्व होता है। तो आइए आज हम यहां जानेंगे एक-एक कर सभी रत्नों के बारे में। साथ ही हम यह भी समझेंगे कि कौन सा रत्न किस राशि के जातकों के लिए शुभ है, किस रत्न को कैसे और कब धारण करना हमारे लिए खुशियों की सौगात लिए है।