जानें क्या करें और क्या ना करें बृहस्पतिवार के दिन, बनी रहेगी माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा दृष्टि

Things You Should Do and Should Not Do on Thursday

बृहस्पतिवार अर्थात गुरुवार का दिन देव गुरु बृहस्पति का होता है। बृहस्पतिवार को सभी ग्रहों के अधिपति तथा सभी ग्रहों समेत सभी देवी-देवताओं, अपितु संपूर्ण ब्रह्मांड के गुरु के रूप में स्वीकारा गया है।

बृहस्पति को काफी महत्व दिया जाता है। वहीं यदि हम बृहस्पतिवार अर्थात गुरुवार के दिन के आराध्य देव के संबंध में वार्तालाप करें, तो सनातन हिंदू धर्म में इस दिन हेतु आराध्य देव बृहस्पति के साथ-साथ भगवान श्री हरि विष्णु को भी माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि जो भी जातक गुरुवार के दिन बृहस्पति देव के साथ-साथ भगवान श्री हरि विष्णु का विशेष पूजन करते हैं, उन जातकों के जीवन में खुशहाली व सुख-समृद्धि सदैव बरकरार रहती है। चूँकि बृहस्पति सभी ग्रहों व देवी देवताओं के गुरु हैं, अतः वे सभी में ज्ञान, बौद्धिकता व शिक्षा का संचार करने का कार्य करते हैं। इसके अतिरिक्त बृहस्पतिवार का दिन भगवान श्री हरि विष्णु, अर्थात माता लक्ष्मी के स्वामी भगवान श्री हरि विष्णु का दिन है। इस वजह से यह दिन माँ लक्ष्मी हेतू भी खास माना जाता है।

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दरअसल हिंदू धर्म व ज्योतिष शास्त्र आदि के साथ सभी धार्मिक ग्रंथों और रचनाओं में यह परिलक्षित किया गया है कि 'जहाँ सरस्वती का वास होता है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है।' अर्थात, जहाँ माँ सरस्वती प्रवास करती हैं, उसी स्थान पर माँ लक्ष्मी की भी इज्जत होती है। इस वजह से माता लक्ष्मी उसी घर व व्यक्ति के जीवन में रहना पसंद करती हैं जिसके जीवन में सरस्वती का प्रवास होता है।

माँ सरस्वती के मुख्य कारक ग्रहों के अधिपति बृहस्पति हैं जो जातकों की बौद्धिकता को सकारात्मकता प्रदान करते हैं और दिशानिर्देश कर जीवन को धन्य व कृतार्थ बनाने का अहम कार्य करते  है।

इन्ही दोनों वजहों से अर्थात देवगुरु बृहस्पति के साथ-साथ लक्ष्मी के निवास तथा भगवान श्री हरि विष्णु की अर्धांगिनी होने के कारण भगवान श्री हरि विष्णु के साथ की वजह से, बृहस्पतिवार के दिन को माता लक्ष्मी की पूजा व विशेष कृपा हेतु अत्यंत ही शुभकारी माना जाता है।

तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि गुरुवार के दिन देवी लक्ष्मी की कृपा पात्र बने रहने हेतु व अपने जीवन से आर्थिक समस्याओं के समाधान तथा माता लक्ष्मी के प्रवेश व वास हेतू जातकों को बृहस्पतिवार के दिन किन तथ्यों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

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तो चलिए जानते है इस दिन जातकों को किन क्रियाकलापों को करना चाहिए तथा किन चीजों से परहेज करना चाहिए। आइये सर्वप्रथम जानें गुरुवार के दिन किये जाने वाले शुभकारी कार्यों के संबंध में।

क्या करें बृहस्पतिवार के दिन?

  • चूँकि बृहस्पतिवार का दिन भगवान श्री हरि विष्णु से भी संबंधित होता है, इस दिन यानी बृहस्पतिवार के दिन पीले रंग के वस्त्रों का सर्वाधिक शिरोधार्य करें। दरअसल गुरु का मूल रंग पीला तथा भगवान श्री हरि विष्णु के आध्यात्मिक रंग के भी पीला होने की वजह से गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्रों का ही धारण करना चाहिए।
  • ऐसा माना जाता है कि पीला रंग माता लक्ष्मी को भी अत्यंत ही प्रिय है। अतः आप पीले वस्त्र धारण करने के साथ-साथ इस दिन गरीबों तथा जरूरतमंद व्यक्तियों में पीले रंग के वस्त्रों व वस्तुओं का दान करें। इससे आपके जीवन में खुशहाली, सुख संपत्ति व सकारात्मकता प्रदीप्त होंगी।
  • गुरुवार के दिन जातकों को भगवान श्री हरि विष्णु तथा माँ लक्ष्मी की विशेष आराधना करनी चाहिए। इस दिन आप इनका पंचामृत से स्नान कराएं और इन्हें सुंदर पीले रंग के वस्त्र तथा पीले रंग के पुष्प आदि से सजाएं। तत्पश्चात माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान श्री हरि विष्णु का भी विशेष पूजन करें। इस दिन आप माँ लक्ष्मी के साथ भगवान श्री हरि विष्णु की आरती का पाठ भी करें।
  • प्रत्येक गुरुवार के दिन नित्य क्रिया, स्नान आदि को संपन्न कर आप स्वच्छ पवित्र होकर भगवान सूर्य की पूजा आराधना करें। भगवान सूर्य को अर्घ्य प्रदान करें और लाल-पीले पुष्प समर्पित करें।
  • इस दिन के केले के वृक्ष के समीप जाकर आप एक घी का दीपक अवश्य ही जलाएं और केले के पेड़ पर रोली से स्वस्तिक का चिन्ह भी बनाएं। इस दिन आप अपने मस्तक पर तथा आप अपने पारिवारिक जनों के मस्तक पर भी पीले रंग के तिलक लगाएं।
  • चूँकि गुरुवार का दिन देव गुरु बृहस्पति का होता है, इस दिन आप अपने गुरुओं, वरिष्ठ जनों व श्रेष्ठ जनों के प्रति सम्मानजनक दृष्टि रखें। आप उनका सम्मान करें, उनकी आज्ञा का पालन करें तथा उनके जीवन की सकारात्मकताओं को अपने जीवन में शिरोधार्य करने का प्रयत्न करें। इस दिन आप अपने पूजन स्थल व कार्यस्थल आदि पर भी पीली वस्तुओं का अधिक प्रयोग करें।
  • गुरुवार के दिन जातकों को अपने घर से पहली रोटी ले जाकर गाय को खिलानी चाहिए। गाय को कामधेनु माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। जो जातक गाय की सेवा करते हैं, उन जातकों के जीवन में माता लक्ष्मी अपनी कृपा दृष्टि सदैव बरकरार रखती हैं।
  • माता लक्ष्मी को सोना अत्यंत ही प्रिय है। अतः आप गुरुवार के दिन अगर संभव हो तो अधिक से अधिक स्वर्ण धातु का धारण करें, साथ ही अगर संभव हो तो इस दिन सोने की धातु का दान भी करें।

गुरुवार के दिन जातकों को कुछ कार्यों को भूलवश भी नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि कुछ क्रियाकलाप जातकों के जीवन में नकारात्मकता लाने का कार्य करते हैं। तो आइए जानते है ऐसे कुछ कार्यों के संबंध में-

क्या ना करें चाहिए गुरुवार के दिन?

  • गुरुवार के दिन जातकों को भूलकर भी अपने नाखून नहीं काटने चाहिए। अपने नाखून में किसी भी प्रकार के नुकीले पदार्थ व धातुओं को नहीं लगाना चाहिए।
  • गुरुवार के दिन जातकों को अपने गंदे-मैले कपड़े नहीं धोने चाहिए। इस दिन संभव हो तो साबुन, डिटर्जेंट आदि जैसे पदार्थों का कम से कम प्रयोग करें, साथ ही कम से कम जल की बर्बादी करें।
  • गुरुवार के दिन जातकों को बाल भी नहीं कटवाने चाहिए। पुरुषों को शेविंग भी नहीं करवानी चाहिए। साथ ही इस दिन महिला जातकों को अपने बाल भी नहीं धोने चाहिए।
  • चूँकि गुरु यांत्रिकी वस्तुओं व मशीनरी पदार्थों हेतु उपयुक्त व प्रमुख ग्रह माने जाते है, अतः गुरुवार के दिन जातकों को मशीनरी पदार्थों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए। इस दिन कैंची, ब्लेड, सुई आदि जैसी धातु से बने नुकीले पदार्थों आदि के प्रयोग से बचना चाहिए।


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