कौन सा रत्न है आपके लिए मंगलकारी और कौन सा है घातक?

Know which Gemstone is lucky for you and which is unlucky

पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रत्नों में कुल 84 प्रकार के रत्न होते हैं जिनमें से कई अभी विद्यमान है, तो कई लुप्त हो चुके हैं। हालांकि कुछ शास्त्रों के अनुसार जब क्षीर सागर का देवतागण और दानव मिलकर मंथन कर रहे थे, उस दौरान 14 प्रकार के रत्नों की समुद्र मंथन से उत्पत्ति हुई थी जिन्हे प्रमुख माना जाता है। किंतु अगर प्रचलित रत्नों की बात करें तो प्रचलन में नवग्रहों को ही लिया जाता है।

ज्योतिष शास्त्रों में मुख्य रूप से नौ ग्रहों का ही प्रचलन है। अगर हम ग्रहों को उनकी बनावट के आधार पर वर्गीकृत करें, तो यह मुख्य रूप से तीन प्रकार में वर्गीकृत होता है ।

पहला है प्राणिज रत्न, अर्थात ऐसे रत्न जो जीव-जंतु आदि से निर्मित होते हैं, अथवा जो जीवो का अवशेष माने जाते हैं। इस प्रकार के रत्नों में गजमुक्ता, मूंगा आदि को गिना जाता है।

वहीं दूसरा है वनस्पतिक रत्न, ऐसे रत्न वनस्पति यानी पेड़-पौधों आदि से उत्पन्न होते हैं। ऐसे रत्नों में वंशलोचन, त्रिनमणि, जेट आदि को गिना जाता है।

वहीं तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण रत्न है खनिज रत्न, अर्थात जो प्राकृतिक तौर पर निर्मित होता हो। ऐसे रत्नों के निर्माण में सैकड़ों हजारों वर्ष लग जाते हैं। इस प्रकार के रत्न चट्टान, भूगर्भ, समुंद्र तल आदि से प्राप्त किए जाते हैं। प्रायः मूल्यवान रत्न खनिज रत्न ही होते है।

आज हम यहां जानेंगे प्रमुख नवरत्नों के संबंध में ज्योतिषीय तथ्य, जिससे आप यह जान पाएंगे कि कौन से रत्न आपके लिए उपयुक्त है, किस रत्न का धारण करने से आपके जीवन के सभी कष्ट-क्लेश एवं बाधाएं दूर होंगी और सुख-समृद्धि, ऐश्वर्या, धन्य-धान्य आदि भरा पूरा रहेगा। वहीं दूसरी ओर हम यह भी बताएंगे कि नवरत्नों में से कौन है वह रत्न जो आपके लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है जिसका धारण करना आपके लिए सभी परेशानियों एवं मुसीबतों की वजह बन सकता है।

आइए जानते हैं नवरत्नों का ग्रह गोचरों की स्थिति के अनुरूप भिन्न-भिन्न राशियों के लिए प्रभाव।

1. मूंगा

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार मंगल ग्रह की राशि वाले जातकों को मूंगा पहनना चाहिए। मेष और वृश्चिक राशि मंगल ग्रह की राशि मानी जाती है, अतः इन जातकों को ज्योतिषीय परामर्श के पश्चात मूंगा का धारण करना चाहिए।

माना जाता है कि मूंगा व्यक्ति के अंदर साहस, आत्मविश्वास एवं आंतरिक शक्ति को बढ़ाने का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त पुलिसकर्मी, आर्मी, डॉक्टर, प्रॉपर्टी डीलिंग से सम्बंधित काम करने वाले लोग, हथियार आदि का निर्माण करने वाले व्यक्ति, सर्जन, हार्डवेयर इंजीनियर, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर आदि व्यवसाय से जुड़े लोगों को मूंगा पहनने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। मूंगा रक्त से संबंधित रोग, पीलिया, मिर्गी आदि हेतु अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अतः इसे ज्योतिषीय परामर्श से विधिवत तौर पर धारण करें।

2. हीरा

हीरा के संबंध में लाल किताब में यह वर्णित है कि जिन जातकों के तीसरे, पांचवें और आठवें स्थान पर शुक्र होता है, उन्हें हीरा धारण नहीं करना चाहिए। ऐसे जातकों के जीवन में अथवा आसपास टूटा-फूटा हीरा होना भी हानिकारक माना जाता है। यदि जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह, मंगल या गुरु की राशि में विराजमान हो, या फिर इनमें से किसी एक में दृश्यमान हो रहा हो या फिर राशियों के परिवर्तन का भाव प्रदर्शित हो रहा हो, तो ऐसे में यह मारकेश की भांति बर्ताव करता है। ऐसी परिस्थिति में जातक का मन आत्महत्या अथवा पाप कर्म आदि की ओर अग्रसरित होता है।

वहीं जिन जातकों का शुक्र ग्रह कमजोर माना जाता है, उन जातकों के लिए हीरा अत्यंत ही शुभकारी होता है। अतः इसे ज्योतिषीय परामर्श द्वारा अपनी ग्रह गोचरों की स्थिति के अनुरूप ही धारण करें।

3. पन्ना

पन्ना बुध ग्रह राशि के जातकों के लिए उपयुक्त माना जाता है। अतः बुध की राशि मिथुन और कन्या को ज्योतिष शास्त्र में पन्ना पहनने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि पन्ना धारण करने से व्यक्ति की स्मरण शक्ति तीक्ष्ण होती है एवं हाजमे से संबंधित समस्या दूर होती हैं। पन्ना नौकरी और व्यापार संबंधित कार्यों में भी सफलता प्रदायक होता है। इससे कारोबार की अति शीघ्र उन्नति होती है।

लाल किताब के मुताबिक यदि बुध, जातक की कुंडली के तीसरे अथवा 12 वें भाग में मौजूद हो तो व्यक्ति को पन्ना नहीं पहनना चाहिए। साथ ही अगर आपकी कुंडली के छठे, आठवें अथवा बारहवें भाव का स्वामी ग्रह बुध है, तो ऐसी स्थिति में पन्ना धारण करने से आपको अचानक किसी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप पर बुध की महादशा चल रही हो और बुध आपकी कुंडली के आठवें अथवा बारहवें भाव में विराजमान हो, तो ऐसे में पन्ना धारण करना आपके लिए संकट उत्पन्न कर सकता है।

4. मोती

चंद्र तथा गुरु की राशि के जातकों के लिए मोती धारण करना लाभकारी माना जाता है। चंद्र की राशि कर्क तथा गुरु की राशि मीन होती है। अतः इन जातकों को मोती का धारण करना चाहिए। माना जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते रहते हैं, मन की बेचैनी दूर होती है, तनाव दूर होता है, सर्दी-जुकाम, बुखार आदि से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है। जिन जातकों को भय दोष रहता है, उन जातकों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि आदि बनी रहेगी। सभी प्रकार के भय, दोष आदि से आपको मुक्ति प्राप्त करने में मोती अत्यंत ही लाभकारी माना जाता है।

मोती के संबंध में लाल किताब में यह कहा गया है कि जिन भी जातकों की कुंडली में चंद्रमा 12वें अथवा 11वें घर में होता है, उन जातकों के लिए मोती पहनना हानिकारक माना जाता है। साथ ही जिन जातकों की राशि शुक्र, बुध तथा शनि की होती है, उन्हें भी मोती का धारण नहीं करना चाहिए। जो लोग अधिक भावुक एवं क्रोधी प्रवृत्ति के होते हैं, अर्थात ऐसे लोग जिनका अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रख पाना कठिन होता है, ऐसे लोगों को मोती धारण नहीं करना चाहिए। यह उनके लिए अपनी नकारात्मक प्रभाव परिलक्षित करता है।

5. माणिक्य

माणिक्य, सूर्य की राशि के जातकों को पहनने के लिए कहा जाता है। सूर्य की राशि सिंह होती है। अतः सिंह राशि के जातकों को माणिक्य का धारण करना चाहिए। माणिक्य राजकीय प्रशासनिक कार्यों से जुड़े मसलों में आपको लाभ दिलाता है। ऐसे मसलों में परिणाम आपके पक्ष में आते हैं। यदि माणिक्य आपके लिए सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर रहा होता है, तो आपके चेहरे पर विशिष्ट चमक दृश्यमान होती है ।

वहीं जब माणिक्य अपने नकारात्मक प्रभाव आप पर डाल रहा हो, अथवा यह आपके ग्रह-गोचरों की स्तिथियों के अनुकूल ना हो, तो इस कारण से आपको सर दर्द अथवा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहेंगी, घर-परिवार में कलह क्लेश बना रहेगा, आपके ऊपर झूठा आरोप लग सकता है, अपयश यानी मानहानि होने की संभावना आदि बनी रहती है।

6. पुखराज

धनु तथा मीन राशि के जातकों को पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है। पुखराज बृहस्पति यानी गुरु का रत्न होता है। पुखराज धारण करने से जातक को लोक प्रसिद्धि प्राप्त होती है। इससे व्यक्ति का मान-सम्मान बढ़ता है एवं यह शिक्षा-करियर आदि से संबंधित मसलों में यह आपके लिए लाभदायक सिद्ध होता है। मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक तथा धनु और मीन राशि के जातक यदि पुखराज का धारण करते हैं तो उन्हें संतान से संबंधित समस्या से मुक्ति मिलती है, साथ ही धन, वैभव, पद, प्रतिष्ठा एवं विद्या में भी वृद्धि होती है।

लाल किताब के अनुसार वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला और मकर राशि के जातकों को पुखराज का धारण नहीं करना चाहिए। ऐसे जातकों को किसी ज्योतिषी से अपनी कुंडली दिखा कर ग्रह, नक्षत्र, भाव आदि के अनुसार ही पुखराज का धारण करना चाहिए। यदि धनु राशि के जातकों में धनु और गुरु लग्न भाव में है तो ऐसे जातकों को पुखराज अथवा सोना हाथों में धारण नहीं करना चाहिए। ऐसे जातकों के लिए पुखराज गले में धारण करना उपयुक्त होता है।

7. नीलम

नीलम शनि ग्रह के जातकों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसका धारण कुंभ तथा मकर राशि के जातकों को करना चाहिए। यदि आपकी कुंडली में शनि लग्न पंचम अथवा ग्यारहवें भाव में है, तो नीलम का धारण ना करें। नीलम एक ऐसा रत्न होता है जो राजा को रंक तथा रंक को भी राजा बना देने की शक्ति रखता है। अतः नीलम धारण करने से पूर्व अपने कुंडली को किसी ज्योतिषी से अवश्य दिखायें, तत्पश्चात ही परामर्श के अनुसार नीलम पहने। यह व्यक्ति की दूरदृष्टिता और कार्यकुशलता को बढ़ाता है, साथ ही आर्थिक मामलों पर भी अपनी पकड़ रखता है। नीलम धारण करने से सुख-समृद्धि एवं आर्थिक वृद्धि होती है।

8. गोमेद

गोमोद राहु से जुड़े जातकों को पहनने की सलाह दी जाती है। इसे धारण करने से व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता काफी बेहतरीन होती है। यह काले-जादू, टोने-टोटके एवं बुरी नजर से बचाता है,  साथ ही अचानक घटने वाले लाभ एवं अचानक पहुंचने वाले नुकसान से भी बचाने का कार्य करता है। आकस्मिक घटनाएं गोमेद पहनने से टल जाती है।

लाल किताब में वर्णित है कि यदि आपकी कुंडली में राहु 12वें, 11वें, पांचवें, आठवें या फिर नौवें स्थान पर हो तो गोमोद पहनना अशुभकारी होता है। इससे आपके आये दिन किसी न किसी प्रकार से नुकसान होते रहते हैं।

वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दोषमुक्त गोमेद धारण करने से किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है। यह पेट से संबंधित रोग एवं आर्थिक नुकसान से बचाने के साथ-साथ पुत्र पर आने वाले संकट, कारोबार में होने वाली हानि एवं रक्त संबंधित समस्याओं से निजात दिलाता है।
वहीं जब यह आपके लिए प्रतिकूल प्रभावी होता है तो आकस्मिक मृत्यु तक हो जाने की संभावना बनी रहती है। अतएव बिना ज्योतिषीय परामर्श के गोमेद धारण ना करें, यह खतरे से खाली नहीं है।

9. लहसुनिया

लहसुनिया पहनने के लिए केतु से जुड़े जातकों को सलाह दी जाती है। लहसुनिया का संस्कृत में नाम वैदूर्य है। इसके संबंध में कहा जाता है कि यह कारोबार से जुड़े सभी समस्याओं का निदान करता है एवं लाभ के योग बनाता है, साथ ही इसे धारण करने से व्यक्ति को कभी भी किसी की बुरी नजर नहीं लगती।

लाल किताब में लहसुनिया के संबंध में वर्णित है कि अगर किसी जातक के तीसरे और छठे भाव में केतु हो तो उन्हें लहसुनिया नहीं पहनना चाहिए। यह उन जातकों के लिए नुकसानदेह साबित होता है, वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि लहसुनिया दोषयुक्त हो तो यह किसी प्रकार का नुकसान नहीं प्रदान करता है।



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