मसालों में छिपें है आपके ग्रहों की सेहत के राज

Effects of Spices on Planets

ग्रह-गोचर, भाव-कुंडली आदि में लगभग हम सभी यकीन करते हैं। हम यह भी मानते हैं कि हमारे जीवन में हो रहे हर छोटे-बड़े परिवर्तन किसी ना किसी रूप में ग्रहों एवं उनकी स्थितियों से प्रभावित होते हैं, साथ ही हमारी दिनचर्या के लगभग सभी क्रियाकलाप, वस्तुएं ग्रह गोचर की स्थिति एवं प्रभाव पर अपना असर डालते हैं। पर क्या आपने रोजमर्रा की जिंदगी में खानपान, उपचार आदि में प्रयुक्त होने वाले मसालों के संबंध में ऐसा कुछ सोचा है? क्या आपको कभी ऐसा महसूस हुआ है कि ये रंग-बिरंगे, स्वादिष्ट मसाले आपके ग्रह नक्षत्रों से भी जुड़े हो सकते हैं? आम तौर पर इसका जवाब ना में आता है, तो चलिए आज हम आपको मसालों के ग्रह पर पड़ने वाले प्रभाव संबंध गुण आदि का स्वाद चखाते हैं। आखिरकार आपको भी तो पता होना चाहिए।

मसालों का ज़ायका

आज दुनिया भर में भारतीय मसालों का जायका सुप्रसिद्ध है। यहाँ के मसालों की विश्व भर में मांग रहती है। इसी कारण भारत मसालों के मामले में विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता एवं निर्यातक है। भारत का केरल राज्य मसालों के लिए विश्वभर में सुप्रसिद्ध है। हालांकि भारत में मसालों की सर्वाधिक उत्पादकता आंध्र प्रदेश की है।

भारतीय मसालों को भारतीयों के भोजन में नमक से कम नहीं आंका जा सकता है। कुछ सामान्य मसाले तो ऐसे हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जरूरत ही नहीं बल्कि आदत हो चुके हैं। जैसे हल्दी, लाल मिर्च, जीरा आदि।

वैसे मसाले सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए ही काम नहीं आते, बल्कि स्वास्थ्य बढ़ाते हैं। कई ऐसे असाध्य रोग है जिसमें मसालों का औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। कुल मिलाकर भारतीय मसालों का जायका हर किसी की जिंदगी में को अपना स्वाद चखाता है। मसालों के इन उपयोगों के बारे में आप सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कहीं ना कहीं तो रूबरू हुए ही होंगे, पर मसालों के ज्योतिषीय तथ्यों के संबंध में आपने शायद ही कभी सुना हो। तो चलिए आज जान ही लेते हैं कि मसालों से ज्योतिष का किस प्रकार है संबंध-

मसालों से सम्बंधित ज्योतिषिय तथ्य

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मसालों का संबंध हमारी कुंडली में मौजूद नौ ग्रहों से होता है। यह शरीर एवं स्वास्थ्य के अतिरिक्त भिन्न-भिन्न प्रकार से हमारे ग्रह गोचरों पर भी अपना प्रभाव दिखाता है। तो आइए आज हम जानते हैं हमारी कुंडली में मौजूद नवग्रह पर मसालों का कैसा प्रभाव पड़ता है। यह ज्योतिषीय तथ्यों के अनुरूप किस प्रकार हम से संबंधित है-

ग्रहों के अनुरूप भिन्न-भिन्न मसालों का प्रभाव

1. सूर्य

सूर्य ग्रह से संबंधित मसालों में लाल मिर्च को सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है। यह मंगल ग्रह पर भी अपना असर डालता है। यह स्वाद ग्रंथि को सर्वाधिक प्रभावित करने वाला मसाला माना जाता है। इससे शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया तीव्र होती है, साथ ही यह व्यक्ति में साहस एवं शक्ति का भी विस्तार करता है। इसके अतिरिक्त गुड़, सरसों, काली मिर्च, जौं आदि भी सूर्य ग्रह को प्रभावित करते हैं।
 
2. चंद्र

चंद्र ग्रह से संबंधित मसालों में इलायची को तवज्जो दिया जाता है। इलायची श्वास रोग संबंधित समस्याओं में लाभकारी साबित होता है। यह एक सुगंध प्रदायक मसाला है जिसका प्रभाव चंद्र ग्रह पर दिखता है। इलायची के अलावा हींग की तीखी सुगंध शारीरिक समस्याओं से निजात दिलाती है। इससे पेट से संबंधित परेशानी जैसे गैस बनना, वायु प्रकोप आदि समाप्त होता है। खोपरा जिसका प्रयोग अक्सर ग्रेवी बनाने में किया जाता है, यह भी चंद्र ग्रह को प्रभावित करता है।

3. मंगल

मंगल तथा सूर्य दोनों के लिए लाल मिर्च को मसालों में सर्वाधिक प्रभावी माना जाता है। इसके अतिरिक्त रतनजोत सब्जियों में रंग और स्वाद उत्पन्न करने का कार्य करता है, यह भी मंगल को प्रभावित करता है। साथ ही शरीर में शक्ति का संचार करता है। लाल मिर्च के अतिरिक्त दालचीनी, अदरक, मेथी, मूंगफली आदि का भी मंगल पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

4. बुध

ज्योतिष शास्त्रों में बुध ग्रह का रंग हरा माना गया है। मसालों में इसे धनिया से जोड़ा जाता है। धनिये के सेवन से पित्त संतुलित रहता है, साथ ही इसका सेवन गंदगी का भी सफाया करता है। अगर किसी जातक को मूत्र संबंधित कोई समस्या या रोग होता है, तो उसमें भी यह लाभकारी है। धनिया के अतिरिक्त हींग तथा हरी इलायची को भी बुध का प्रभावी मसाला माना जाता है।

5. बृहस्पति

मसालों में सबसे अधिक प्राचीन एवं गुणकारी हल्दी को माना जाता है। हल्दी का संबंध आदि काल से ही आयुर्वेद से है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ाता है। किसी भी छोटे-से-छोटे, बड़े-से-बड़े आदि घाव को भरने में इसका प्रयोग किया जाता है। यह विष के प्रति भी अपनी प्रतिरोधक क्षमता को प्रदर्शित करता है। इसका रंग पीला होता है जो बृहस्पति के रंग का है। हल्दी का प्रयोग बृहस्पति पर असर डालता है। हल्दी के अलावा बंगाली चना, जौं आदि भी बृहस्पति पर अपना असर डालते हैं। इससे पित्त भी संतुलित होता है।

6. शुक्र

शुक्र ग्रह के लिए जीरा को सबसे अधिक उपयुक्त मसाला माना जाता है। यह भूख बढ़ाने में मददगार सिद्ध होता है। इससे शरीर से एसिडिटी जैसी अम्लीय प्रभाव से संबंधित समस्याएं समाप्त होती हैं। जीरा के अतिरिक्त सौंफ को भी शुक्र ग्रह पर प्रभावी मसाला माना जाता है। इनके अतिरिक्त खड़ा नमक, दालचीनी, मटर, बींस, सोंफ आदि का भी शुक्र पर प्रभावी मसाले माने जाते हैं।

7. शनि

मसालों में काली मिर्च को शनि ग्रह से संबंधित माना जाता है। काली मिर्च कफनाशक होती है, इसके अतिरिक्त इसका बेहतरीन प्रयोग पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में भी किया जाता है। काली मिर्च से शनि प्रबल होता है। काली मिर्च के अतिरिक्त लॉन्ग को भी शनि हेतु प्रभावी माना जाता है। लॉन्ग दांत संबंधित समस्याओं का निदान करता है, इसके अलावा सिर दर्द में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इनके अलावा काले तिल, शहद, तेल, आदि का भी शनि ग्रह पर प्रभाव पड़ता है।

8. राहु

राहु के प्रभाव के लिए तेजपत्ता अत्यंत ही उपयुक्त होता है। यह एक सुगंधित पदार्थ है। इसे दर्दनाशक माना जाता है। राहु के साथ जायफल को भी जोड़ा जाता है। जायफल भोजन में सुगंध उत्पन्न करने का कार्य करता है, साथ ही अन्य कई रोगों में भी यह लाभकारी होता है। सर्दियों में इसका प्रयोग बढ़ जाता है। तेजपत्ता और जायफल के अलावा लहसुन, काबुली चने, काले चने और मसाला उत्पादक पौधों पर भी राहु और केतु का विशेष प्रभाव दिखता है। कुछ लोग जीरा पर भी केतु एवं राहु के अधिकार को मानते हैं।

9. केतु

केतु के लिए अजवाइन को उपयुक्त माना जाता है। इसके सेवन से पित्त संबंधित समस्याएं समाप्त होती हैं। अजवाइन से गैस एवं अन्य पेट संबंधित कई समस्याओं का नाश होता है। अजवाइन के अलावा इमली, अमचूर आदि भी केतु के अधिकारी मसाले माने जाते हैं। जीरा को भी केतु से प्रभावित मसाला माना जाता है।



राजीव दीक्षित संस्थान द्वारा आयुर्वेदिक एवं स्वदेशी उत्पाद खरीदें, और संस्था को आगे बढ़ाने में सहयोग करें
अभी आर्डर करें