इस बार दीपावली पर यह होगा पूजा हेतु निशिता वंदना और चौघड़िया मुहूर्त का सही समय

Diwali 2020 Puja Nishita Vandana and Choghadiya Muhurat

दीपावली को हिन्दू धर्म का बहुत ही बड़ा व महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस पर्व को सभी लोग बहुत ही धूमधाम से कार्तिक मास की अमावस्या को मनाते हैं। चारों ओर प्रकाश और खुशहाली बिखेरने वाले इस पर्व के दिन माँ लक्ष्मी तथा गणेश भगवान की पूजा की जाती है। इस अनोखे पर्व का उत्साह बच्चों से लेकर वृद्ध व्यक्ति हर किसी में दिखाई पड़ता है। घर की महिलाएं कई दिन पहले से ही घर की साफ-सफाई तथा सजावट आदि करने लगती हैं। बच्चे आतिशबाजी का सामान इकट्ठा करते हैं और इस मौके पर हर व्यक्ति अपने करीबी मित्रों व रिश्तेदारों को उपहार आदि भी देता हैं। हर घर में कई प्रकार की मिठाइयां और पकवान भी बनते हैं। इस वर्ष यह त्योहार 14 नवंबर दिन शनिवार को है। तो चलिए जानते हैं कि इस बार की दीवाली की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।

लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त

इस बार दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 1 घंटे 54 मिनट के लिए प्रदोष काल में बन रहा है। दीपावली के दिन होने वाली लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम के समय 5 बजकर 29 मिनट से लेकर 7 बजकर 23 मिनट तक के बीच है। इसके अतिरिक्त लक्ष्मी पूजा का निशिता काल में शुभ समय देर रात्रि को 11 बजकर 41 मिनट से लेकर देर रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक है। दिवाली पर होने वाली लक्ष्मी पूजा के लिए ऐसे प्रावधान हैं कि पूजा को आधे घण्टे या 34 मिनट में ही सम्पन्न करनी चाहिए।

लक्ष्मी पूजन हेतु शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • दोपहर के समय लक्ष्मी पूजा हेतु शुभ मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से संध्या काल 04 बजकर 07 मिनट।
  • संध्याकाल के समय लक्ष्मी पूजा हेतु शुभ मुहूर्त - शाम 05 बजकर 28 मिनट से शाम 07 बजकर 07 मिनट।
  • रात्रि के समय लक्ष्मी पूजा हेतु शुभ मुहूर्त - रात 08 बजकर 47 मिनट से मध्यरात्रि 01 बजकर 45 मिनट।
  • सुबह लक्ष्मी पूजा हेतु शुभ मुहूर्त - 15 नवंबर सुबह 05 बजकर 04 मिनट से 15 नवंबर सुबह 06 बजकर 44 मिनट।

पूजन की विधि

सर्वप्रथम जलपात्र से जल लेकर उसे सभी भगवान की मूर्तियों पर छिड़ककर उनको पवित्र करें।

इसके बाद पूजा की सामग्री, आसन और खुद को भी नीचे दिए गये मंत्र के जाप के साथ पवित्र करें-

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।।

इसके बाद पृथ्वी माँ की पूजा के साथ उन्हें प्रणाम करें। और इस मंत्र को बोलें -

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब चम्मच या पुष्प की सहायता से एक-एक करके तीन बार पानी की बूँद अपने मुख में डालें। पहली बार बूँद को मुख में डालकर "ॐ केशवाय नमः" मंत्र बोलें। फिर दूसरी बूँद को मुख में डालकर "ॐ नारायणाय नमः" मंत्र बोलें। तीसरी बार "ॐ हृषिकेशाय नमः" मंत्र का उच्चारण करें।

इसके बाद "ॐ हृषिकेशाय नमः" मंत्र बोलते हुए दोनों हाथों को धो लें। यह आचमन की प्रक्रिया कहलाती है। इसके द्वारा आत्मा, बुद्धि और विद्या आदि तत्वों का शोधन होता है।

  • इसके पश्चात तिलक लगाएं।
  • मन को स्थिर व एकग्र करने के लिए प्राणायाम करें और शांत रहें।
  • पूजा की शुरुआत में स्वस्तिवाचन की क्रिया के लिए अक्षत, जल व पुष्प लेकर वेद मंत्रों का उच्चारण कर भगवान के सामने हाथ जोड़कर उनको प्रणाम करें।
  • संकल्प लेकर माँ लक्ष्मी और गणेश भगवान की मन्त्रोच्चारण सहित पूजा करें।
  • इसके बाद दीपकों को एक ही थाली में जलायें।
  • दीपक पूजन के पश्चात घर की महिलाएं खुद ही सोने के सभी आभूषणों को माँ लक्ष्मी को अर्पित करें।
  • अगले दिन सुहाग की सामग्री और आभूषणों को माँ का आशीर्वाद समझ कर वापस लें।

दीपावली का महत्व

प्राचीन कथाओं और हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान रामचन्द्र जब लंका पर जीत हासिल कर अपनी पत्नी सीता तथा अपने अनुज लक्ष्मण को वनवास से लेकर वापस अयोध्या आए थे, तब अयोध्या नगरी के वासियों ने खुशी से पूरी अयोध्या को दीपकों से सजाया था। तभी से लेकर अब तक हर साल कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही दीपावली के पर्व मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा जाता है कि इस दिन माँ दुर्गा ने काली माँ का अवतार लिया था, तथा भगवान महावीर को भी इसी दिन मोक्ष प्राप्त हुआ था।



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